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शोधकर्ताओं ने बनाया नया ऑनलाइन टूल, उच्च रक्तचाप के इलाज में करेगा मदद

by shardul abhishek
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भारत, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने मिलकर एक नया ऑनलाइन टूल बनाया है, जो उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) के इलाज के तरीके में बदलाव ला सकता है। इस टूल की मदद से डॉक्टर यह तय कर पाएंगे कि किस मरीज को किस दवा से अधिक फायदा होगा और उसके रक्तचाप को कम करने के लिए कौन-सा इलाज सबसे उपयुक्त रहेगा।

इस टूल का नाम है ‘ब्लड प्रेशर ट्रीटमेंट एफीकेसी कैलकुलेटर’। इसे बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने करीब 1 लाख से अधिक लोगों पर किए गए लगभग 500 बड़े मेडिकल ट्रायल्स के आंकड़े इकट्ठा किए और उनका विश्लेषण किया।

डॉक्टर जब किसी मरीज का इलाज शुरू करते हैं तो अक्सर एक दवा से शुरुआत की जाती है। लेकिन यह दवा आमतौर पर रक्तचाप को सिर्फ 8-9 एमएमएचजी तक कम कर पाती है, जबकि अधिकतर मरीजों को अपने ब्लड प्रेशर को सुरक्षित स्तर तक लाने के लिए 15-30 एमएमएचजी तक की कमी की जरूरत होती है। ऐसे में सही दवा और उसकी सही मात्रा चुनना बहुत जरूरी है।

यही काम यह नया ऑनलाइन टूल आसान बनाता है। यह टूल अलग-अलग दवाओं और उनकी खुराक का औसत असर बताता है और उन्हें तीन स्तरों—निम्न, मध्यम और उच्च तीव्रता—में बांटता है। यानी डॉक्टर यह देख सकते हैं कि कौन-सी दवा कितनी प्रभावी है और उसी हिसाब से रोगी का इलाज तय कर सकते हैं।

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उच्च रक्तचाप को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है। इसका कारण है कि यह बीमारी अपने शुरुआती दौर में कोई लक्षण नहीं दिखाती। मरीज को तब पता चलता है जब यह दिल का दौरा, स्ट्रोक या गुर्दे की समस्या जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन चुकी होती है।

दुनिया भर में करीब 1.3 अरब लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं। हर साल यह बीमारी लगभग 1 करोड़ मौतों की वजह बनती है। दुख की बात यह है कि हर 5 में से सिर्फ 1 मरीज ही अपने ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रख पाता है।

जॉर्ज इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ (हैदराबाद) से जुड़े विशेषज्ञ डॉ. मोहम्मद अब्दुल सलाम ने कहा, “हमें यह समझना होगा कि सही दवाओं और सही खुराक का चुनाव किए बिना ब्लड प्रेशर को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं कर सकते। यही काम यह नया टूल आसान बना देगा।”

यह ऑनलाइन कैलकुलेटर डॉक्टरों को वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगा। अब मरीजों को ट्रायल-एंड-एरर पद्धति से गुजरना नहीं पड़ेगा, बल्कि शुरुआत से ही उन्हें सही इलाज मिल पाएगा। लंबे समय में यह टूल दिल की बीमारियों और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं से लाखों लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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