Home Blogsसिजोफ्रेनिया और अवसाद जैसे मानसिक रोग से बहुत अधिक बढ़ सकता है हृदय रोग और असमय मौत का खतरा

सिजोफ्रेनिया और अवसाद जैसे मानसिक रोग से बहुत अधिक बढ़ सकता है हृदय रोग और असमय मौत का खतरा

by shardul abhishek
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एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि मानसिक बीमारियां जैसे सिजोफ्रेनिया और अवसाद दिल की बीमारियों (हृदय रोग) और मौत के खतरे को बहुत अधिक बढ़ा सकती हैं।

यह रिपोर्ट द लैंसेट रीजनल हेल्थ-यूरोप नाम की पत्रिका में छपी है। इसमें अवसाद, चिंता, सिजोफ्रेनिया, बाइपोलर डिसऑर्डर (बाइपोलर डिसऑर्डर) और पीटीएसडी जैसी बीमारियों वाले लोगों में हृदय संबंधी समस्याओं का सार दिया गया है।

एमरी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने बताया कि सिजोफ्रेनिया से हृदय रोग का खतरा लगभग 100 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। डिप्रेशन (अवसाद) से लगभग 72 फीसदी बढ़ोतरी होती है। पीटीएसडी से 57 प्रतिशत तक, बाइपोलर डिसऑर्डर से 61 प्रतिशत तक, पैनिक डिसऑर्डर से 50 फीसदी तक और फोबिक एंग्जायटी से करीब 70 प्रतिशत तक खतरा बढ़ जाता है।

शोध यह भी बताता है कि अगर किसी को पहले से हृदय रोग है और साथ में गंभीर अवसाद भी है, तो उसकी मौत का खतरा दोगुने से भी ज्यादा बढ़ जाता है। यानी मानसिक बीमारी और हृदय रोग साथ होने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है।

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रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि मानसिक स्वास्थ्य और हृदय स्वास्थ्य का आपस में गहरा रिश्ता है। उदाहरण के लिए, हृदय रोग वाले 40 प्रतिशत लोग मानसिक बीमारियों से भी जूझते हैं। मानसिक बीमारियों वाले लोगों को अक्सर सही इलाज और नियमित देखभाल नहीं मिल पाती।

कई बार आर्थिक समस्या, अस्पताल तक पहुंच न होना या जानकारी की कमी (हेल्थ लिटरेसी) बड़ी बाधा बनती है। इन कारणों से मरीज अपनी जांच और इलाज समय पर नहीं करा पाते।

विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ हृदय रोग या सिर्फ मानसिक बीमारी का इलाज काफी नहीं है। दोनों का मिलाजुला इलाज जरूरी है। इसके लिए डॉक्टर, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, नर्सिंग स्टाफ और सोशल वर्कर की एक टीम मिलकर मरीज की देखभाल करे।

एमरी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर वियोला वैकारिनो ने कहा, “दिल और दिमाग का स्वास्थ्य आपस में गहराई से जुड़ा है। इसलिए हमें ऐसी स्वास्थ्य व्यवस्था चाहिए जो दोनों समस्याओं को एक साथ संभाल सके। इन रोगियों की देखभाल के लिए एक नैदानिक ​​टीम आदर्श होगी (विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नर्सिंग स्टाफ की एक टीम) जो बहु-विषयक देखभाल (मल्टीडिसीप्लिनरी केयर) और संसाधन प्रदान करने के लिए मिलकर काम करती है।”

अगर इस तरह का संयुक्त इलाज और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था बनाई जाए तो मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोग भी अच्छी तरह जी सकेंगे, हृदय रोग का खतरा कम होगा और वे समाज में पूरी तरह सक्रिय रह पाएंगे।

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