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ऐतिहासिक विकास
वैदिक काल: विष्णु का महत्व वैदिक ग्रंथों में बढ़ना शुरू हुआ, खासकर ‘ब्राह्मण काल’ में, जब उन्हें ‘यज्ञ’ के रूप में देखा जाने लगा।
भागवत धर्म: महाभारत में वासुदेव को विष्णु से अभिन्न बताया गया, जिससे वासुदेवोपासकों का ‘भागवत धर्म’ (वैष्णव धर्म) प्रसिद्ध हुआ।
भक्ति आंदोलन: 10वीं सदी में रामानुजाचार्य ने वैष्णव संप्रदाय की स्थापना की, और बाद में तुलसीदास, सूरदास और मीराबाई जैसे संतों ने इसे लोकप्रिय बनाया।
मुख्य संप्रदाय
वैष्णव संप्रदाय के मुख्य चार सम्प्रदाय हैं, जिनमें प्रत्येक के अपने आचार्य हैं:
श्री सम्प्रदाय: प्रमुख आचार्य रामानुजाचार्य हैं, जो भगवान लक्ष्मीनारायण की उपासना करते हैं और विशिष्टाद्वैत दर्शन का पालन करते हैं।
ब्रह्म सम्प्रदाय: प्रमुख आचार्य माधवाचार्य हैं और यह भगवान विष्णु को सर्वोच्च मानते हैं।
रुद्र सम्प्रदाय: इसमें विष्णुस्वामी और बाद में वल्लभाचार्य शामिल हैं, जो भगवान श्रीकृष्ण की भावमयी सेवा पर बल देते हैं (पुष्टिमार्ग)।
कुमार सम्प्रदाय: प्रमुख आचार्य निम्बार्काचार्य हैं, जो भगवान कृष्ण और राधा के युगल स्वरूप की उपासना करते हैं।
वैष्णव सम्प्रदाय 

अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी
वैष्णव संप्रदाय का इतिहास प्राचीन है और यह भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा पर केंद्रित है। इसका मूल भगवत धर्म में है और उपनिषदों में इसका उल्लेख मिलता है, जहाँ देवकी के पुत्र कृष्ण को एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के रूप में दर्शाया गया है।




